कैसे भारतीय गणित को दबाया गया

कैसे भारतीय गणित को दबाया गया

Biggest Scam of Maths Exposed?
कैसे भारतीय गणित को दबाया गया

My sincere gratitude and heartfelt appreciation go to Rishabh Arya for this mini-documentary. Please follow him on Twitter at @limitlessarya and subscribe to his YouTube Channel.

TRANSCRIPT BELOW VIDEO ⬇️

Biggest Scam of Mathematics Exposed | कैसे भारतीय गणित को दबाया गया ? Underrated Math of Bramhagupt

अगर  मैं आपसे कहूं की आपने बचपन में जो बेसिक मैथ्स पढ़ी है , वो गलत पढ़ी है तो आप क्या कहेंगे ? आप सोचेंगे की कैलकुलेशन करने में तो कोई प्रॉब्लम नहीं आती सब उसी का यूज कर रहे है मिस्टेक किस बात की ? असल में हमे जो मैथ्स बचपन में पढ़ाई गयी वह परफेक्ट नहीं है उसमे कई कमियां है , वह भारत से कॉपी की गयी लेकिन फिर भी उसमे कई कमियां रह गयी , ऐसा मैं नहीं बल्कि एक विदेशी रिसर्चर का कहना है की किस तरह वेस्टर्न ने भारतीय गणित को कॉपी किया और जिसकी वजह से बेसिक मैथ्स में भी कई मिस्टेक्स है जानने के लिए वीडियो को पूरा जरूर देखें |

जोनाथन ज क्रैबट्री एक मैथमैटिशन है जिन्होंने गणित की हिस्ट्री को पढ़कर रिसर्च में पाया की वेस्टर्न लोगों ने भारतीय गणित को बुरी तरह कॉपी करके अपने हिसाब से परोसा , जिसमे उन्होंने कई कॉन्सेप्ट्स को बिलकुल गलत तरीके से समझा , चाहे वो ज़ीरो हो , मल्टिप्लिकेशन हो , या नेगेटिव नंबर्स हो , इनको समझने में उन्होंने बारी भूल की , जिसका नतीजा है की आज हम अपनी ही भारतीय गणित जो परफेक्ट थी उसे न पढ़कर उसी गणित का विदेशी version पढ़ रहे है जिसमे कई कमियां है , आपके बच्चे भी इसी मैथ्स को पढ़ रहे हैं |

जोनाथन भारत में एक मिशन को लेकर सक्रिय है जिसमे वो भारत के बच्चे बच्चे को ब्रम्हगुप्त की भारतीय गणित पढ़ना चाहते हैं , ये भारत में अनेक बच्चों को भारतीय गणित पढ़ा चुके है और अपने मिशन को लेकर भारतियों को जगाने में लगे हैं |

जिस बेसिक अरिथमैटिक्स को हमने बचपन में पढ़ा वह युक्लीडियन अरिथमैटिक है जो पूर्ण नहीं , और वेस्टर्न ने भारतीय गणित को ही उल्टा समझकर उसे युक्लीडियन मैथ्स के सात मिलाकर प्रेजेंट किया जिसमे कई कॉन्सेप्ट्स गलत बताये जाते है , जिसकी वजह से मैथ्स का रियलिटी से नाता टूट जाता है जबकि भारतीय गणित सुपीरियर और परफेक्ट है |

असल में ५ वि सदी में जब यूरोप के लोग कपडे पहनना भी नहीं जानते थे तब भारत में गणित का विकास हो चूका था , आर्यभट्ट और ब्रम्हगुप्त जैसे गणितज्ञों ने तब बेसिक मैथ्स से लेकर कैलकुलस और ट्रिगोनोमेट्रिक तक की गणित विकसित कर ली थी |

भारतीय गणित अरब के रास्ते से होकर यूरोप पहुंची , एक अरबी व्यक्ति अल ख़्वाहिरिज्मि ने ब्रम्हगुप्त की गणित को अरबी में ट्रांसलेट किया था। ब्रम्हगुप्त ने ५ श्लोकों में गणित के 18 सिद्धांतों का प्रतिपादन किया , अल ख़्वारिज़्मी ने इसे गलत ट्रांसलेट क्र लिया जिसकी वजह से उसने 1 को कोई नंबर ही कंसीडर नहीं किया और 0 तो उसने लिया ही नहीं |

अरब से भारतीय गणित यूरोप पहुंची ,यूरोपियन्स ने ज़ीरो को सिर्फ प्लेसहोल्डर् के रूप में लिया उसे पूरा नहीं समझा जबकि मल्टिप्लिकेशन और एडिशन में भी ज़ीरो का रोले होता है , यूरोपियन्स ने ग्रीक mathamtician यूक्लिड की मैथ्स और भारतीय मैथ्स को मिलाकर गणित को प्रेजेंट किया , जहाँ उनोने नेगेटिव नंबर्स को कांसेप्ट को भी गलत समझा |

आश्चर्य की बात यह है की भारतीय गणित को चुराकर भी ब्रम्हगुप्त के १००० साल बाद तक भी विदेशी इसे समझ ही नहीं पाए , ब्रम्हगुप्त के १००० साल के बाद matematics की पहली बुक पब्लिश हुयी जिसमे नंबर्स को २ से स्टार्ट होना माना गया |

आज जो मैथ्स आप और आपके बच्चे पढ़ रहे है वह भारतीय गणित का ही बिगड़ा हुआ रूप है , जोनाथन जैसे रिसर्चर्स ने अपनी रिसर्च में या पाया कि ब्रम्हगुप्त की गणित को गलत समझा गया

जिसमे मल्टिप्लिकेशन सब्सट्रैक्शन , ज़ीरो और नेगेटिव के कॉन्सेप्ट को सही से नहीं समझा गया |

सबसे पहले हम ज़ीरो की बात करते है  ज़ीरो की परिभाषा ब्रम्हगुप्त बताते हैं समैक्यं ख़म यानी कि जहाँ पॉजिटिव और नेगेटिव बराबर हो जाए वो ज़ीरो है म किसी संख्या को उसी से घटना ज़ीरो है , इस डेफिनिशन से यह आसानी  से एक्सप्लेन हो जाता है की -*- पॉजिटिव क्यों होता है ?

ब्रम्हगुप्त ने बताया की ज़ीरो सिर्फ  एक प्लेसहोल्डर नहीं बल्कि इसका प्रयोग मल्टिप्लिकेशन में भी होता है |

मॉडर्न मैथ्स नेगेटिव नंबर्स की डेफिनिशन बताती है की वो नंबर्स जो जीरो से नीचे है वे नेगेटिव नंबर्स है लेकिन ब्रम्हगुप्त ने नेगेटिव को अलग तरीके से डिफाइन किया है , ब्रम्हगुप्त के अनुसार नेगेटिव एक विपरीत क्वांटिटी को रिप्रेजेंट करता है एक्साम्प्ले के लिए एक मीटर उभार को पॉजिटिव नंबर माने तो उतना ही १ मिटर का खड़ा नेगेटिव नंबर होगा , यानि नेगेटिव नंबर रियलिटी से सम्बंधित है , जैसे इलेक्ट्रान और पॉज़िट्रान , दो विपरीत डायरेक्शन में लगने वाले समान बल , ठंडा और गर्म

मॉडर्न मैथ्स के कांसेप्ट को फॉलो करें तब नेगेटिव 1 , नेगटिव 5 से बड़ा नंबर है जबकि भारतीय गणित में नेगटिव १ , नेगटिव 5 से छोटा नंबर है |

मतलब की एक मीटर का गड्ढा , 5 मीटर के गड्ढे से छोटा होगा न की बड़ा ?

मल्टिप्लिकेशन को ले तो  एक्साम्प्ले के लिए २*२ को मॉडर्न मैथ्स डिफाइन करते हुए बताती है की २ को २ बार जोड़ना

लेकिन यह डेफिनिशन परफेक्ट नहीं , इसी डिफनिशन को -२* -२ पर अप्लाई करें तो इसे मॉडर्न डेफिनिशन से डिफाइन नहीं कर सकते |

अब ब्रम्हगुप्त बताते है की २*२ का मतलब 2 को 0 में २ बार जोड़ना

और यही डेफिनिशन -२* -२ पर अप्लाई करें तो इसका मतलब होगा -२ को 0 में से २ बार घटाना , जिसका आंसर +४ ही आएगा

यानि की मल्टिप्लिकेशन में ज़ीरो का रोले होता है |

-*- = + क्यों होता है ?

इसे ज़ीरो के कांसेप्ट से easily प्रूफ किया जा सकता है , ज़ीरो एक ऐसा नंबर है जिसमे नेगटिव और पॉजिटिव बेलेंस है |

फॉर एक्साम्पल +*+ = + इसे पोसिटिव into पॉजिटिव न कहकर , पॉजिटिव एडेड ऐसा कहेंगे , ज़ीरो जिसमे पॉजिटिव और नेगटिव बैलेंस्ड है उसमे हम पॉजिटिव ऐड कर दें तो यह इम्बैलेंस होकर पॉजिटिव डोमिनेंट हो जायेगा , इसलिए आंसर पॉजिटिव ोगा |

इसी तरह +*- यानि पॉजिटिव सुब्स्ट्रक्टेड , अब ज़ीरो में से पॉजिटिव हटा दें तो नेगेटिव बचेगा इसलिए यह नेगेटिव होता है |

-*+ यानि नेगेटिव एडेड तब नेगेटिव का डोमिनान्स होने से आंसर नेगेटिव होगा |

-*- यानि की नेगेटिव सुब्स्ट्रक्टेड , ज़ीरो में से आओ नेगेटिव को हटा ले तो पॉजिटिव बचेगा इसलिए यह पॉजिटिव के इक्वल होता है |

यह सभी laws ब्रम्हगुप्त ने ही बताये थे , जिसे यूरपियन्स ने अपने तरीके से प्रेजेंट किया |

जोनाथन भारत में बच्चों को भारतीय मैथ्स दिखाते है जिसमे रियल वर्ल्ड को ध्यान में रखकर प्रोब्लेम्स को सोल्वे किया जाता है जिस से बच्चों की इमेजिन पॉवर बढ़ती है , इन्होने एक पेटिशन भी लगाया है ताकि इंडियन govt इनकी मदद करे और भारतीय परफेक्ट मैथ्स को पूरे भारत में सिखाया जाए | इनके पेटिशन को आप sign जरूर करें |

तो फ्रेंड्स भारतीय मैथ्स के बारे में जानकर आपको कैसा लगा कॉमेंट्स में मुझे जरूर बताये मैं मिलता हु आपसे किसी अगले वीडियो में तब तक के लिए नमस्ते